Monday, October 17, 2016

शिर्क

शिर्क के बारे में यह बात वाज़ेह रहनी चाहिये कि शिर्क सिर्फ़ यही नहीं है कि कोई मूर्ति ही सामने रख कर उसको सज्दा किया जाये, बल्कि और बहुत सी बातें और बहुत से नज़रियात भी शिर्क के ज़ुमरे में आते हैं. यह एक ऐसी बीमारी है जो हर दौर में भेस बदल-बदल कर आती है, चुनाँचे इसे पहचानने के लिये बहुत वुसअत नज़री की ज़रूरत है. मसलन आज के दौर का एक बहुत बड़ा शिर्क नज़रिया-ए-वतनियत है, जिसे अल्लामा इक़बाल ने सबसे बड़ा बुत क़रार दिया है, “इन ताज़ा ख़ुदाओं में बड़ा सबसे वतन है!” यह शिर्क की वह क़िस्म है जिससे हमारे पुराने दौर के उल्मा भी वाक़िफ़ नहीं थे. इसलिये कि इस अंदाज़ में वतनियत का नज़रिया पहले दुनिया में था ही नहीं.

शिर्क के बारे में एक बहुत सख्त आयत हम दो दफ़ा सूरतुन्निसा (आयत 48 और 116) में पढ़ चुके हैं: {} “अल्लाह तआला इसे हरगिज़ माफ़ नहीं फ़रमायेगा कि उसके साथ शिर्क किया जाये, अलबत्ता इससे कमतर गुनाह जिसके लिये चाहेगा माफ़ फ़रमा देगा.” अल्लाह तआला शिर्क से कमतर गुनाहों में से जो चाहेगा, जिसके लिये चाहेगा, बगैर तौबा के भी बख्श देगा, अलबत्ता शिर्क से भी अगर इन्सान ताइब हो जाये तो यह भी माफ़ हो सकता है. 

: डॉक्टर इसरार अहमद (रहि०)

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