Monday, December 7, 2015

Hazrat Uzair (AS) ka Waqya (Suratul Baqrah, Ayat 259) हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम का वाक़िया (सूरतुल बक़रह, आयत 259)

Hazrat Uzair (AS) ka Waqya (Suratul Baqrah, Ayat 259) हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम का वाक़िया (सूरतुल बक़रह, आयत 259)

اَوْ كَالَّذِيْ مَرَّ عَلٰي قَرْيَةٍ وَّهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰي عُرُوْشِهَا  ۚ قَالَ اَنّٰى يُـحْيٖ ھٰذِهِ اللّٰهُ بَعْدَ مَوْتِهَا  ۚ فَاَمَاتَهُ اللّٰهُ مِائَـةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهٗ  ۭ قَالَ كَمْ لَبِثْتَ  ۭ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا اَوْ بَعْضَ يَوْمٍ  ۭ قَالَ بَلْ لَّبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ فَانْظُرْ اِلٰى طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَـنَّهْ  ۚ وَانْظُرْ اِلٰى حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ اٰيَةً لِّلنَّاسِ وَانْظُرْ اِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنْشِزُھَا ثُمَّ نَكْسُوْھَا لَحْــمًا  ۭ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهٗ  ۙ قَالَ اَعْلَمُ اَنَّ اللّٰهَ عَلٰي كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ  ٢٥٩؁

"या फिर जैसे कि वह शख्स (उसका वाक़िया ज़रा याद करो) जिसका गुज़र हुआ एक बस्ती पर और वह ओंधी पड़ी हुई थी अपनी छतों पर. उसने कहा कि अल्लाह इस बस्ती को, इसके इस तरह मुर्दा और बर्बाद हो जाने के बाद किस तरह ज़िन्दा करेगा? तो अल्लाह ने उस पर मौत वारिद कर दी सौ बरस के लिये और फिर उसको उठाया. पूछा कितना अरसा यहाँ रहे हो? कहने लगा एक दिन या एक दिन का कुछ हिस्सा. “(अल्लाह तआला ने) फ़रमाया बल्कि तुम पूरे सौ साल इस हाल में रहे हो, तो ज़रा तुम अपने खाने और अपने मशरूब को (जो सफ़र में तुम्हारे साथ था) देखो, उनके अन्दर कोई बसांद पैदा नहीं हुई. और (दूसरी तरफ) अपने गधे को देखो (हम इसको किस तरह ज़िन्दा करते हैं). और ताकि हम तुम्हें लोगों के लिये एक निशानी बनायें, और अब इन हड्डियों को देखो, किस तरह हम इन्हें उठाते हैं, फिर (तुम्हारी निगाहों के सामने) इनको गोश्त पहनाते हैं. पस जब उसके सामने यह बात वाज़ेह हो गयी वह पुकार उठा कि मैंने पूरी तरह जान लिया (और मुझे यक़ीन कामिल हासिल हो गया) कि अल्लाह हर शै पर क़ादिर है."



आयत 259 { اَوْ كَالَّذِيْ مَرَّ عَلٰي قَرْيَةٍ وَّهِيَ خَاوِيَةٌ عَلٰي عُرُوْشِهَا  ۚ } “या फिर जैसे कि वह शख्स (उसका वाक़िया ज़रा याद करो) जिसका गुज़र हुआ एक बस्ती पर और वह ओंधी पड़ी हुई थी अपनी छतों पर.”
            तफ़सीर में अगरचे इस वाक़िये की मुख्तलिफ़ ताबीरात मिलती हैं, लेकिन ये दरअसल हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम का वाक़िया है जिनका गुज़र येरुशलम शहर पर हुआ था जो तबाह व बर्बाद हो चुका था. बाबुल (इराक़) के बादशाह बख्तनसर (Nebuchadnezzar) ने 586 ई०पू० में फ़लस्तीन पर हमला किया था और येरुशलम को ताखत व ताराज कर दिया था. इस वक़्त भी इराक़ और इसराइल की आपस में बदतरीन दुश्मनी है. ये दुश्मनी दर हक़ीक़त ढाई हज़ार साल पुरानी है. बख्तनसर के हमले के वक़्त येरुशलम बारह लाख की आबादी का शहर था. बख्तनसर ने छ: लाख नफूस को क़त्ल कर दिया और बाक़ी छ: लाख को भेड़ बकरियों की तरह हाँकता हुआ क़ैदी बना कर ले गया. ये लोग डेढ़ सौ बरस तक असीरी (captive) में रहे और येरुशलम उजड़ा रहा है. वहाँ कोई मुतनफ्फिस ज़िन्दा नहीं बचा था. बख्तनसर ने येरुशलम को इस तरह तबाह व बर्बाद किया था कि कोई दो ईंट सलामत नहीं छोड़ी. उसने हैकल सुलेमानी को भी मुकम्मल तौर पर शहीद कर दिया था. यहूदियों के मुताबिक़ हैकल के एक तहखाने में “ताबूते सकीना” भी था और वहाँ उनके रबाई भी मौजूद थे. हैकल मस्मार होने पर वहीँ उनकी मौत वाक़ेअ हुई और ताबूते सकीना भी वहीँ दफ़न हो गया. तो जिस ज़माने में ये बस्ती उजड़ी हुई थी, हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम का उधर से गुज़र हुआ. उन्होंने देखा कि वहाँ कोई मुतनफ्फिस ज़िन्दा नहीं और कोई इमारत सलामत नहीं.
            { قَالَ اَنّٰى يُـحْيٖ ھٰذِهِ اللّٰهُ بَعْدَ مَوْتِهَا  ۚ } “उसने कहा कि अल्लाह इस बस्ती को, इसके इस तरह मुर्दा और बर्बाद हो जाने के बाद किस तरह ज़िन्दा करेगा?”
            उनका ये सवाल इज़हारे नौइयत का था कि इस तरह उजड़ी हुई बस्ती में दोबारा कैसे अहया हो सकता है? दोबारा कैसे इसमें लोग आकर आबाद हो सकते हैं? इतनी बड़ी तबाही व बर्बादी कि कोई मुतनफ्फिस बाक़ी नहीं, कोई दो ईंटे सलामत नहीं!
            { فَاَمَاتَهُ اللّٰهُ مِائَـةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهٗ  ۭ } “तो अल्लाह ने उस पर मौत वारिद कर दी सौ बरस के लिये और फिर उसको उठाया.”
            {  قَالَ كَمْ لَبِثْتَ  ۭ } “पूछा कितना अरसा यहाँ रहे हो?”
            {  قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا اَوْ بَعْضَ يَوْمٍ  ۭ } “कहने लगा एक दिन या एक दिन का कुछ हिस्सा.”
            उनको ऐसा महसूस हुआ जैसे थोड़ी देर के लिये सोया था, शायद एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा मैं यहाँ रहा हूँ.
            { قَالَ بَلْ لَّبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ} “(अल्लाह तआला ने) फ़रमाया बल्कि तुम पूरे सौ साल इस हाल में रहे हो”
            { فَانْظُرْ اِلٰى طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَـنَّهْ  ۚ} “तो ज़रा तुम अपने खाने और अपने मशरूब को (जो सफ़र में तुम्हारे साथ था) देखो, उनके अन्दर कोई बसांद पैदा नहीं हुई.”
            उनमें से कोई शै गाली-सड़ी नहीं, उनके अन्दर कोई
            { وَانْظُرْ اِلٰى حِمَارِكَ } “और (दूसरी तरफ) अपने गधे को देखो (हम इसको किस तरह ज़िन्दा करते हैं)”
            हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम की सवारी का गधा इस अरसे में बिलकुल ख़त्म हो चुका था, उसकी बोशीदा हड्डियाँ ही बाक़ी रह गयी थीं, गोश्त गल-सड़ चुका था.
            { وَلِنَجْعَلَكَ اٰيَةً لِّلنَّاسِ} “और ताकि हम तुम्हें लोगों के लिये एक निशानी बनायें”
            यानि ऐ उज़ैर अलैहिस्सलाम! हमने तो खुद तुम्हें लोगों के लिये एक निशानी बनाया है, इसलिये हम तुम्हें अपनी यह निशानी दिखा रहे हैं ताकि तुम्हें दोबारा उठाये जाने पर यक़ीन कामिल हासिल हो.
            { وَانْظُرْ اِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنْشِزُھَا } “और अब इन हड्डियों को देखो, किस तरह हम इन्हें उठाते हैं”
            { ثُمَّ نَكْسُوْھَا لَحْــمًا  ۭ} “फिर (तुम्हारी निगाहों के सामने) इनको गोश्त पहनाते हैं.”
            चुनांचे हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम के देखते ही देखते उनके गधे की हड्डियाँ जमा होकर उसका ढाँचा खड़ा हो गया और फिर उस पर गोश्त भी चढ़ गया.
            { فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهٗ  ۙ } “पस जब उसके सामने यह बात वाज़ेह हो गयी”
            हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम ने बचश्मे सर एक मुर्दा जिस्म को ज़िन्दा होने का मुशाहिदा कर लिया.
            { قَالَ اَعْلَمُ اَنَّ اللّٰهَ عَلٰي كُلِّ شَيْءٍ قَدِيْرٌ  ٢٥٩؁} “वह पुकार उठा कि मैंने पूरी तरह जान लिया (और मुझे यक़ीन कामिल हासिल हो गया) कि अल्लाह हर शै पर क़ादिर है.”
            उन्हें यक़ीन हो गया कि अल्लाह तआला इस उजड़ी हुई बस्ती को भी दोबारा आबाद कर सकता है, इसकी आबादी अल्लाह तआला के इख़्तियार में है.
            हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम को बनी इसराइल की निशाते सानिया (Renaissance) के नक़ीब की हैसियत हासिल है. बाबुल की असारत के दौरान यहूद अख्लाक़ी ज़वाल का शिकार थे. जब हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम को अल्लाह तआला ने मुतज़क्कर बाला मुशाहदात करवा दिये तो आप अलैहिस्सलाम ने वहाँ जाकर यहूद को दीन की तालीम दी और उनके अन्दर रूहे दीन को बेदार किया. इसके बाद ईरान के बादशाह केखोरस (Cyrus) ने जब बाबुल (इराक़) पर हमला किया तो यहूदियों को असारत (Captive) से निजात दी और उन्हें दोबारा फ़लस्तीन में जाकर आबाद होने की इजाज़त दे दी. इस तरह येरुशलम की तामीरे नौ हुई और ये बस्ती 136 साल बाद दोबारा आबाद हुई. फिर यहूदियों ने वहाँ हैकल सुलेमानी दोबारा तामीर किया जिसको वह माअबूदे सानी (Second Temple) कहते हैं. फिर ये हैकल 70 ई० में रोमन जनरल टाइटस के हाथों तबाह हो गया और अब तक दोबारा तामीर नहीं हो सका. दो हज़ार बरस होने को आये हैं कि उनका काबा ज़मींबोस है. यही वजह है कि आज दुनिया भर के यहूदियों के दिलों में आग सी लगी हुई है और वह मस्जिदे अक्सा को मस्मार करके वहाँ हैकल सुलेमानी (माअबूदे सालिस) तामीर करने के लिये बेताब हैं. उसके नक्शे भी तैयार हो चुके हैं. बस किसी दिन कोई एक धमाका होगा और ख़बर आ जायेगी कि किसी जुनूनी (Fanatic) ने वहाँ जाकर बम रख दिया था, जिसके नतीजे में मस्जिदे अक्सा शहीद हो गयी है. आपके इल्म में होगा कि एक जुनूनी यहूदी डॉक्टर ने मस्जिदे अल खलील में 70 मुस्लमानों को शहीद करके खुद भी खुदकुशी कर ली थी. इसी तरह कोई जुनूनी यहूदी मस्जिदे अक्सा में बम नसब करके उसको गिरा देगा और फिर यहूदी कहेंगे कि जब मस्जिद मस्मार हो ही गयी है तो अब हमें यहाँ हैकल तामीर करने को. जैसे अयोध्या में बाबरी मस्जिद के इन्हदाम के बाद हिन्दुओं का मौक़फ़ था कि जब मस्जिद गिर ही गयी है तो अब यहाँ पर हमें राम मन्दिर बनाने दो! बहरहाल ये हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलाम का वाक़िया था. अब इसी तरह का एक मामला हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का मुशाहिदा है.

Translated from Bayanul Quran Book. Page 156-157
Find Original Book in Urdu here:

http://data.tanzeem.info/BOOKS/1_-_Quran-e-Hakeem_aur_Hamari_Zindagi/BU-1-13-Bayan-ul-Quran-1.pdf 

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