Wednesday, November 11, 2015

बनी इसराइल (आयत 40, सूरह बक़रह)

बनी इसराइल (आयत 40, सूरह बक़रह)

يٰبَنِىْٓ اِسْرَاۗءِيْلَ اذْكُرُوْا نِعْمَتِىَ الَّتِىْٓ اَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَاَوْفُوْا بِعَهْدِىْٓ اُوْفِ بِعَهْدِكُمْ   ۚ   وَاِيَّاىَ فَارْھَبُوْنِ   40؀

ऐ बनी इस्राईल! याद करो मेरे उन ईनाम को जो मैंने तुम पर कियाऔर तुम मेरे वादे को पूरा करो ताकि मैं भी तुम्हारे वादे को पूरा करूँ। और सिर्फ मुझ ही से डरो।

बनी इस्राईल की तरकीब को समझ लीजिये कि ये मुरक्कबे इज़ाफी है। अस्र का मायना है बन्दा या गुलाम। इसी से असीर बना है जो किसी का क़ैदी होता है। और लफ्ज़ आईल इब्रानी में अल्लाह के लिये आता है। चुनांचे बनी इस्राईल का तुर्जमा होगा अब्दुल्लाह यानि अल्लाह का गुलाम, अल्लाह की इताअत के क़लादे के अन्दर बंधा हुआ। इस्राईल लक़ब है हज़रत याक़ूब (अलै0) का। उनके बारह बेटे थे और उनसे जो नस्ल चली वही बनी इस्राईल है। उन्ही में हज़रत मूसा (अलै0) की बेअसत हुई और उन्हें तौरात दी गयी। फिर ये एक बहुत बड़ी उम्मत बने। क़ुरआन मजीद के नुज़ूल के वक़्त तक उन पर उरूज व ज़वाल के चार अदवार (मौके) आ चुके थे। दो मर्तबा उन पर अल्लाह ताअला की रहमत की बारिश हुई और उन्हें उरूज़ नसीब हुआ, जबकि दो मर्तबा दुनिया परस्ती, शहवत परस्ती और अल्लाह के अहकात को पशे पुस्त डाल देने की सज़ा में उन पर अल्लाह के अज़ाब के कोड़े बरसे। इसका ज़िक्र सूरहः बनी इस्राईल के पहले रुकूअ में आयेगा। उस वक़्त जबकि क़ुरआन नाज़िल हो रहा था वह अपने उस ज़वाल के दौर में थे। हाल ये था कि मौहम्मद रसूल अल्लाह () की बेअसत से पहले ही उनका माअबूदे सानी (Second Temple) भी मुनहदिम (गिराया) जा चुका था। हज़रत सुलेमान (अलै0) ने जो हैकल सुलेमानी बनाया था, जिसको ये माबूदे अव्वल (First Temple) कहते हैं, उसे बख्तनसर (Nebukadnezar) ने हज़रत मसीह से भी छः सौ साल पहले गिरा दिया था। उसे उन्होंने दोबारा तामीर किया था जो माबूदे सानी कहलाता था। लेकिन 70 ई० में मौहम्मदे अरबी () की विलादत से पाँच सौ साल पहले रोमियो ने हमला करके येरूशलम को तबाह व बरबाद कर दिया, यहूदियों का क़त्ले आम किया और जो माबूदे सानी उन्होंने तामीर किया था उसे भी मसमार (तबाह) कर दिया, जो अब तक गिरा पड़ा है, सिर्फ एक दीवारे गिरया (Veiling Wall) बाक़ी है जिसके पास जाकर यहूदी मातम और गिरया वज़ारी कर लेते हैं, और अब वह उसे सेबारा (तीसरी बार) बनाने पर तुले हुऐ हैं। चुनांचे उनके माबूदे सालिस (Third Temple) के नक्शे बन चुके हैं, उसका इब्तदाई ख़ाका तैयार हो चुका है। बहरहाल जिस वक़्त कु़रआन नाज़िल हो रहा था उस वक़्त ये बहुत ही पस्ती में थे। उस वक़्त उनसे फरमाया गयाः ऐ बनी इस्राईल! ज़रा याद करो मेरे उस ईनाम को जो मैंने तुम पर किया था। वह ईनाम क्या है? मैंने तुमको अपनी किताब दी, नबूवत से सरफराज़ फरमाया, अपनी शरीअत तुम्हें अता फरमायी। तुम्हारे अन्दर दाऊद और सुलेमान (अलै0) जैसे बादशाह उठाये, जो बादशाह भी थे, नबी भी थे।

बनी इस्राईल से नबी आखिरुज़्ज़माँ हज़रत मौहम्मद () पर ईमान लाने का अहद लिया गया था। तौरात में किताबे इस्तस्ना या सफर-ए-इस्तस्ना (Deuteronomy) के अट्ठहारवे बाब की आयत 18-19 में अल्लाह ताअला ने हज़रत मूसा (अलै0) से ख़िताब करके ये अल्फाज़ फरमायेः
मैं उनके लिये उन्ही के भाईयों में से तेरी मानिन्द एक नबी बरपा करूँगा और अपना कलाम उसके मुँह में डालूँगा और जो कुछ मैं उसे हुक्म दूँगा वही वह उनसे कहेगा। और जो कोई मेरी उन बातों को जिनको वह मेरा नाम लेकर कहेगा, ना सुने तो मैं उनका हिसाब उससे लूँगा।
ये गोया हज़रत मूसा (अलै0) की उम्मत को बताया जा रहा था कि नबी आखिरुज़्ज़माँ () आयेंगे और तुम्हें उनकी नबूवत को तस्लीम करना है। क़ुरआन मजीद में इसका तफ्सीली ज़िक्र सूरतुल आराफ में आयेगा। यहाँ फरमाया कि तुम मेरा अहद पूरा करो, मेरे इस नबी () को तस्लीम करो, उस () पर ईमान लाओ, उसकी () की सदा पर लब्बैक कहो तो मेरे ईनाम व इकराम मज़ीद बढ़ते चले जायेंगे।

Translated from Bayanul Quran Book. Page 72-73
Find Original Book in Urdu here : 
http://data.tanzeem.info/BOOKS/1_-_Quran-e-Hakeem_aur_Hamari_Zindagi/BU-1-13-Bayan-ul-Quran-1.pdf

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